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भक्ति प्राप्त करने के लिए सत्संग में जाना बहुत जरूरी: कथा व्यास

भक्ति प्राप्त करने के लिए सत्संग में जाना बहुत जरूरी: कथा व्यास

 

ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 35वीं पुण्य बरसी समारोह
भक्ति प्राप्त करने के लिए सत्संग में जाना बहुत जरूरी: कथा व्यास

भगवान के मधुर भजन व वाणी सुन श्रद्धालु हुए भाव विभोर

27 जून को भव्य हवन के उपरांत देश के कोने कोने से आए संत- महात्माओं का होगा तिलक लगाकर अभिनंदन

चंडीगढ़ 26 जून ,2022:(आवाज़ आपकी न्यूज )

भक्ति प्राप्त करने के लिए सत्संग में जाना बहुत जरूरी है क्योंकि महापुरूषों ने कहा है कि बिनु सत्संग विवेक न होई, पर राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। यह प्रवचन यह बात सैक्टर 23 डी स्थित श्री महावीर मंदिर मुनि सभा (साधु आश्रम) में ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 35वीं पुण्य बरसी समारोह के उपलक्ष्य में आमंत्रित कथा व्यास बरसाना/जूगियाल, पठानकोट से आए अतुल कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से कहे। इस दौरान उनके श्रीश्री 108 स्वामी श्री पंचानन गिरिजी महाराज भी उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को सत्संग इस प्रकार से श्रवण करना चाहिए कि उनका मन ही वृंदावन बन जाये और मन के वृंदावन होने से उन्हें किसी भी तीर्थ यात्रा में जाने की आवश्यकता नही रहती है। इस अवसर पर कथा व्यास द्वारा एक से बढक़र भगवान के मधुर भजनों को सुना कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। प्रवचन के पश्चात समारोह में आई विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने संकीर्तन किया इससे मंदिर प्रांगण संगीतमयी हो गया।

इससे पूर्व ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज जी का पूजन विधि विधान के साथ किया गया। इस दौरान सभा के प्रधान श्री दलीप चन्द गुप्ता व महासचिव एसआर कश्यप, सास्कृतिक सचिव पं.श्री दीप भारद्वाज, उपप्रधान श्री ओ.पी पाहवा, कार्यालय सचिव नंदलाल शर्मा तथा कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र गुप्ता उपस्थित थे।

संतो महात्माओं का अभिनंदन 27 जून को: सभा के प्रधान श्री दलीप चन्द गुप्ता ने बताया कि समारोह 27 जून तक मंदिर में आयोजित किया जायेगा तथा 27 जून को प्रात: 9 बजे हवन किया जायेगा जिसके पश्चात् कथा का भोग व देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों आमंत्रित संत महात्माओं का पूजन श्री श्री 108 स्वामी श्री पंचानन गिरी जी महाराज के सानिध्य में किया जायेगा और उन्हेंं तिलक लगाकर वस्त्र, फल तथा दक्षिणा आदि के साथ उनका अभिनंदन किया जाएगा।